टेक्नोलॉजी

UPI के 10 साल पूरे… कभी जेब में कैश जरूरी था, अब QR कोड ही काफी! 11 देशों तक पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम

नई दिल्ली: एक समय था जब घर से निकलते वक्त जेब में कैश और छुट्टे पैसे रखना जरूरी माना जाता था। लेकिन आज सड़क किनारे चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में भुगतान हो जाता है। इस बदलाव के पीछे भारत के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) की बड़ी भूमिका है।

25 अगस्त 2016 को लॉन्च हुआ UPI अब अपने 10 साल के सफर में भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति की पहचान बन चुका है। इन वर्षों में UPI के इस्तेमाल में ऐसी तेजी आई कि आज इसका नेटवर्क भारत से बाहर भी पहुंच चुका है।

2 करोड़ से 24 हजार करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन तक पहुंचा सफर

UPI की शुरुआत के समय इसका इस्तेमाल बेहद सीमित था। वित्त वर्ष 2016-17 में करीब 2 करोड़ ट्रांजेक्शन UPI के जरिए हुए थे।

लेकिन इसके बाद डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2025-26 तक UPI ट्रांजेक्शन की संख्या 24,162 करोड़ से अधिक पहुंच गई। इसी अवधि में ट्रांजेक्शन की कुल वैल्यू भी करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

शुरुआत में UPI से केवल 44 बैंक जुड़े थे, जबकि जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 741 बैंक हो चुकी है।

नए फीचर्स ने पेमेंट को बनाया और आसान

UPI की लोकप्रियता सिर्फ इसकी आसान प्रक्रिया की वजह से नहीं बढ़ी, बल्कि समय के साथ इसमें लगातार नए फीचर्स जोड़े गए।

2017 में Dynamic QR Code, इसके बाद UPI 2.0, UPI AutoPay, Credit Line और UPI Circle जैसी सुविधाओं ने डिजिटल भुगतान को और सुविधाजनक बनाया।

टैक्स भुगतान के लिए UPI की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक की गई। वहीं 2025 में फिंगरप्रिंट और फेस अनलॉक जैसी सुविधाओं से भुगतान को और आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए गए।

जुलाई 2026 में बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

UPI के बढ़ते इस्तेमाल का अंदाजा इसके हालिया आंकड़ों से लगाया जा सकता है। मई 2026 में पहली बार मासिक UPI ट्रांजेक्शन 2,320 करोड़ के पार पहुंच गए।

इसके बाद जुलाई 2026 में यह आंकड़ा और बढ़कर 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड बताया जा रहा है।

इस हिसाब से रोजाना औसतन 66 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजेक्शन किए जा रहे हैं।

इंटरनेट नहीं है तो भी कर सकेंगे UPI पेमेंट

UPI की पहुंच सिर्फ स्मार्टफोन और इंटरनेट यूजर्स तक सीमित नहीं है। फीचर फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए UPI 123PAY के जरिए बिना इंटरनेट भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।

इसकी भुगतान सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपये तक की गई है। वहीं छोटे और तेज भुगतान के लिए UPI Lite वॉलेट की सीमा 5,000 रुपये है।

भारत से निकलकर 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब सिर्फ भारत का पेमेंट सिस्टम नहीं रह गया है। इसकी सेवाएं या इंटरऑपरेबिलिटी 11 देशों तक पहुंच चुकी है।

इनमें UAE, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव शामिल हैं।

यानी विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी कई जगहों पर UPI के जरिए भुगतान करना आसान हो रहा है।

ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट में भी बड़ी हिस्सेदारी

UPI की सफलता का अंदाजा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगाया जा सकता है। IMF के अनुसार, 2025 में वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही।

यह आंकड़ा बताता है कि भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में चर्चा का विषय बन चुका है।

अब अगले 10 साल पर नजर

UPI के पहले दशक की कहानी तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन की है। अब सरकार का फोकस इसे छोटे कारोबारियों, नए यूजर्स और डिजिटल रूप से कम जुड़े लोगों तक और व्यापक बनाने पर है।

डिजिटल समावेशन, नए भुगतान फीचर्स और तकनीकी नवाचार के साथ UPI आने वाले वर्षों में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बना रहेगा।

2016 में 2 करोड़ ट्रांजेक्शन से शुरू हुआ UPI का सफर अब हजारों करोड़ मासिक लेनदेन तक पहुंच चुका है—और QR कोड वाली यह छोटी-सी सुविधा भारत की पेमेंट आदतों में बहुत बड़ा बदलाव ला चुकी है।

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