
राहुल द्रविड़:– एक शानदार विदाई
भारतीय क्रिकेट और विश्व क्रिकेट में बल्लेबाजों के बीच “ग्रेट वॉल” के नाम से मशहूर, महान क्रिकेटर राहुल द्रविड़ का हालिया T20 विश्व कप का फाइनल मैच, भारतीय टीम के हेड कोच के रूप में आखिरी मैच था। और किसी टीम के कोच के लिए उनके खिलाड़ियों के तरफ से इससे बड़ा तोहफ़ा नही हो सकता है कि आखिरी मैच में उनके हाथों में विश्वकप की ट्रॉफी जीत कर दें।
भारतीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़ का योगदान अतुलनीय रहा है चाहे वो एक खिलाड़ी के तौर पर हो या एक कोच के रूप में, जिसे हम निम्न बिंदुओं के माध्यम से उनकी महानता और योगदान पर गौर करेंगे:–
१) एक क्रिकेटर जो क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान सचिन तेंदुलकर से पहले बल्लेबाजी करने आता था।
२) एक क्रिकेटर जो 160 किलोमीटर/घण्टे से आ रही गेंद को अपने पैरों के पास ही रोक देता था।
३) एक क्रिकेटर जिसने 22 गज की पिच पर दुनिया के किसी भी बल्लेबाज की तुलना में सबसे अधिक वक्त गुज़ारा है।
४) एक क्रिकेटर जिसने लोगों में यह विश्वास भरा कि चाहे पूरी टीम ही क्यूँ न आउट हो जाए लेकिन वह आखिरी तक क्रीज पर टिका रहेगा।
५) एक क्रिकेटर जिसे सही मायने में जेंटलमैन कहा जा सकता है क्योंकि उन्हें मैदान पर कभी नाराज़गी जताते हुए नहीं देखा गया।
६) एक क्रिकेटर जिसने इंडियन प्रीमियर लीग की कोचिंग को ठुकरा कर इंडिया-ए और इंडिया अण्डर-19 टीम का कोच बनकर भारतीय टीम की जड़ों को मजबूत करना बेहतर समझा।
७) एक क्रिकेटर जिसे वन डे में 10000 से अधिक रन बनाने के बावजूद कभी छोटे फॉर्मेट का खिलाड़ी नहीं माना गया।
८) एक क्रिकेटर जिसके नाम का स्टैंड नहीं बल्कि चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु के बाहर एक दीवार है जिस पर लिखे तीन शब्द उन्हें पूर्णतः परिभाषित करते हैं वो शब्द हैं कमिटमेंट, क्लास और कंसिसटेंसी। किसी भी खिलाड़ी के लिए या हम आम जन के लिए भी ये तीन शब्द सफलता के एक नए सोपान तक पहुंचा सकता है।
९) एक क्रिकेटर जिसके बारे में दुनिया के आक्रामक बल्लेबाजों में से एक क्रिस गेल ने कहा था कि ये खिलाड़ी मेरी तरह आक्रामक पारी तो खेल सकता है लेकिन मैं इसकी तरह बिल्कुल भी नहीं।
१०) एक क्रिकेटर जिसने टीम की परिस्थिति को देखकर हर तरह की भूमिका स्वीकार की। जब इन्हें 2003 वर्ल्ड कप की टीम में विकेट कीपर की भूमिका दी गई जिसे बेहतरीन तरीके से निभाया और भारतीय टीम महान सौरव गांगुली की कप्तानी में फाइनल तक पहुंची। हालांकि पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही हमारी टीम फाइनल में महान वीरेंद्र सहवाग की बेहतरीन पारी के बावजूद ऑस्ट्रेलिया से हार गई।
११) एक क्रिकेटर जो भारतीय क्रिकेट टीम का कोच बना और हमारी टीम पिछले वर्ष एकदिवसीय मैचों के वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा, हालांकि हम फाइनल जीत नही सकें।
और एक क्रिकेटर जो हमारी टीम को T20 विश्व चैंपियन बनाकर कोच के पद से खुद रिटायर हो गया।
बिनोद कुमार चौधरी
(लेखक क्रिकेट के विश्लेषक हैं)


