चेटीचंड्र शोभायात्रा पर ‘रूट रोक’ का साया! सिंधी समाज भड़का… क्या बदलेगा पारंपरिक मार्ग?
रात 9 बजे के बाद निकलती है यात्रा, फिर क्यों लगा प्रतिबंध? समाज के प्रतिनिधि पहुंचे सांसद के दरबार

रायपुर। रायपुर में चेटीचंड्र की पारंपरिक शोभायात्रा के मार्ग में बदलाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर कमिश्नर के आदेश के मुताबिक आगामी दो माह तक एमजी रोड, मालवीय रोड और जयस्तंभ चौक सहित कई प्रमुख मार्गों पर सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक जुलूस और शोभायात्राओं पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इस फैसले से सिंधी समाज में नाराजगी है और मामला अब राजनीतिक दखल तक पहुंच गया है।
🛑 “हमारी यात्रा 9 बजे के बाद निकलती है, फिर क्यों रोका जा रहा?”
छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की।
प्रदेश अध्यक्ष महेश दरयानी, सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष ललित जैसिंघ और प्रवक्ता सुभाष बजाज ने सांसद के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि चेटीचंड्र की शोभायात्रा हर वर्ष रात 9 बजे के बाद एमजी रोड से जयस्तंभ चौक और मालवीय रोड की ओर जाती है।
उनका तर्क है कि प्रतिबंध रात 9 बजे तक प्रभावी है, जबकि उनकी यात्रा उसके बाद शुरू होती है, इसलिए किसी नियम या आदेश का उल्लंघन नहीं होता।
⚖️ “शांतिपूर्ण समाज, परंपरा से समझौता नहीं”
प्रतिनिधियों ने दोहराया कि सिंधी समाज हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से शोभायात्रा निकालता आया है। उनका कहना है कि परंपरागत मार्ग बदलने से धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत होंगी।
चेटीचंड्र महोत्सव समिति के प्रमुख डॉ. भीमनदास बजाज और महेश पृथ्वानी ने भी सांसद के समक्ष यह मुद्दा रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में कमिश्नर से मुलाकात के दौरान समाज पर तत्काल सहमति देने का अनावश्यक दबाव बनाया गया, जिससे पूरे समाज में असंतोष बढ़ गया है।
🏛️ सांसद ने दिया आश्वासन
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सभी पक्षों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि इस समस्या का जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में सुभाष बजाज, तनेश आहूजा, अनूप मसंद, राजा जेठानी, अमर चंदनानी, अनिल लाहौरी, सागर खटवानी, दीपक कृपलानी, बलराम मंधानी, मनीष बजाज और लेखु गोवानी सहित कई समाजजन मौजूद रहे।
❓ अब क्या होगा फैसला?
सवाल यह है कि क्या प्रशासन परंपरागत मार्ग को मंजूरी देगा या आदेश में बदलाव नहीं होगा?
चेटीचंड्र जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले उठे इस विवाद ने शहर की राजनीति और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और सांसद की अगली पहल पर टिकी हैं—क्या परंपरा जीतेगी या आदेश?




