छत्तीसगढ़

एक फिसलन… और दो जिंदगियां खत्म! तालाब के किनारे पार्टी बनी मातम, गहरे पानी ने निगल लिए दोस्त

शराब के नशे में हाथ-मुंह धोने गए थे… किनारे से ही शुरू थी खतरनाक गहराई, तीन साल में 17वीं दर्दनाक मौत

बिलासपुर। बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में रविवार की शाम खुशियों भरी दोस्ती की महफिल अचानक चीख-पुकार में बदल गई। अमहा तालाब में डूबने से दो युवकों की दर्दनाक मौत हो गई।

मृतकों की पहचान बंधवापारा निवासी हिमांशु चहांदे (21) और देवरीखुर्द निवासी शिवम मानिकपुरी (20) के रूप में हुई है। दोनों अपने पांच दोस्तों के साथ घूमने निकले थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह सैर उनकी जिंदगी की आखिरी शाम बन जाएगी।


🍾 तालाब किनारे बैठकर पी रहे थे शराब… फिर हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, सभी दोस्त खमतराई की ओर घूमने गए थे। अमहा तालाब के किनारे एक पेड़ के नीचे बैठकर वे शराब पीते हुए बातचीत कर रहे थे।

शाम करीब चार बजे हिमांशु और शिवम हाथ-मुंह धोने तालाब की ओर बढ़े। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसला और वे सीधे गहरे पानी में समा गए।


🌊 किनारे से ही शुरू थी गहराई, तैरना भी नहीं आता था

बताया जा रहा है कि अमहा तालाब से मुरूम निकालने के लिए जेसीबी से लगातार खुदाई की गई है। खुदाई के कारण तालाब बेहद गहरा हो चुका है और किनारे से ही खतरनाक गहराई शुरू हो जाती है।

नशे की हालत में संतुलन बिगड़ते ही दोनों सीधे गहरे हिस्से में चले गए। उन्हें तैरना भी नहीं आता था, जिससे वे कुछ ही पलों में डूबने लगे।


🆘 बचाने उतरा तीसरा युवक, वह भी डूबने लगा

दोस्तों ने बचाने की कोशिश की। एक युवक पानी में उतरा, लेकिन उसे भी तैरना नहीं आता था। वह भी डूबने लगा। बाकी साथियों ने किसी तरह उसे बाहर खींच लिया, लेकिन तब तक हिमांशु और शिवम गहराई में लापता हो चुके थे।

कुछ ही देर में तालाब किनारे मातम पसर गया।


📊 तीन साल में 17 मौतें… फिर भी नहीं चेता प्रशासन?

चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में तालाब, नदी और खदान में डूबने से पिछले तीन साल में 17 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद खतरनाक स्थलों पर न तो पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम दिखते हैं।


❓ एक सवाल… कब रुकेगा यह सिलसिला?

दो युवा जिंदगियां एक पल की फिसलन और लापरवाही में खत्म हो गईं। सवाल उठ रहा है—क्या ऐसे हादसे यूं ही होते रहेंगे?

तालाब की खामोश गहराई ने फिर दो घरों के चिराग बुझा दिए… और पीछे छोड़ गईं सिसकियां, पछतावा और अनगिनत सवाल

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