छत्तीसगढ़

मछलियां बदल रहीं किस्मत: मछली पालन से आय को मिल रही रफ्तार, मुंगेली और कोरबा की महिलाएं हो रहीं खुशहाल, बघेल सरकार ने हाथों में थमाया आमदनी का जाल…

ये मेहनतकश और सरकार की सफल योजनाओं की तस्वीर है, जो खुशहाली की कहानी बयां कर रही है. ये हाथों में जाल और जाल में मंछलियां स्व सहायता समूह की तकदीर बदल रही हैं. यूं कहें कि सरकार की योजनाओं से जुड़कर खुद की किस्मत को उकेर रही हैं, जो अन्य महिलाओं के साथ समाज को संदेश दे रही हैं. भूपेश सरकार की ये योजनाएं गांव-गांव खुशहाली, उन्नति और मछली पालकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर रही हैं. मछली पालकों की आमदनी में इजाफा को रफ्तार मिल रही है.

ये तस्वीरें कहीं और कि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के कोरबा और मुंगेली जिले की हैं. जहां भूपेश सरकार की योजनाएं गांव, गली और हर उस शख्स तक पहुंच रही हैं, जहां विकास की जरूरत है. राज्य सरकार मछली पालन को कृषि का दर्जा प्रदान किया है. कोरबा और मुंगेली जिले में समूह की महिलाएं और पुरुष तालाबों में मछली पालन कर अपनी आमदनी को उड़ान दे रहे हैं.

कोरबा में भावना समूह की महिलाओं को मिला आर्थिक लाभ

पाली जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बसीबार में भावना स्वसहायता समूह की महिलाएं गांव में ही मछली पालन करके आर्थिक लाभ कमा रहीं हैं. मछली पालन समूह की महिलाओं को आजीविका संवर्धन का माध्यम बन गया है. विगत सप्ताह समूह की महिलाओं ने डेढ़ क्विंटल मछली बेचकर 25 हजार रूपए कमाए हैं.

आजीविका मिशन से बदल रही किस्मत

कलेक्टर संजीव कुमार झा के द्वारा जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं के आजीविका संवर्धन एवं आर्थिक विकास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम जिले में देखने को मिल रहे हैं.

11 हजार महिला स्व सहायता समूह का गठन

जिला पंचायत सीईओ नूतन कंवर ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत 11 हजार महिला स्व सहायता समूह का गठन किया गया है, जिसमें से 58 हजार महिलाएं कृषि, गैर कृषि, वनोपज, कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़कर सतत् आजीविका से लाभान्वित हो रही हैं.

भावना स्वसहायता समूह का गठन

ग्राम पंचायत बसीबार की 12 महिला सदस्यों ने भावना स्वसहायता समूह का गठन किया है, जिसकी अध्यक्ष कलेश्वरी बाई है. समूह की महिला सदस्यों द्वारा आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विभिन्न गतिविधियां अपनाई जा रही है. इस समूह की महिलाएं गौठान से भी जुड़ी हैं. समूह की सदस्य रीमा कंवर ने बताया कि समूह के सदस्य विगत वर्ष से टारबांध के तालाब में मछली पालन कर रहे हैं.

तालाब में रोहू, कतला और मृगल का पालन

मछली पालन करने के लिए मत्स्य विभाग से उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया है. उन्होंने बताया कि गांव के ही बांध में उन्होंने माह जुलाई में मछली बीज डाला था, जिसकी पर्याप्त देखरेख की गई. उन्हें पर्याप्त दाना दिया गया. तालाब में रोहू, कतला, मृगल, पेटली आदि का मत्स्य पालन किया जा रहा है.

गांव में ही बेचकर 25 हजार रूपए कमाए

अब मछलियां विकसित होकर एक से डेढ़ किलो तक वजन की हो गई हैं. समूह के द्वारा विगत सप्ताह डेढ़ क्विंटल मछली जाल से पकड़ी, जिसे गांव में ही बेचकर 25 हजार रूपए कमाए हैं. बसीबार गांव में ही तथा आसपास के गांव नूनेरा, बांधाखार, जमनीमुड़ा, रैनपुर, केराकछार आदि के ग्रामीणों के द्वारा खरीदी गई.

रमला कंवर कृषि मित्र ने बताया कि समूह की महिलाएं गौठान से जुड़कर गोबर बेचकर, खाद बनाकर आर्थिक लाभ तो प्राप्त कर रही रहीं हैं, इसके साथ ही गांव के ही तालाब में मत्स्य पालन करके लाभ प्राप्त कर रहीं हैं.

मुंगेली में मछली पालन से अच्छी आमदनी

मुंगेली विकासखण्ड के ग्राम केशली के किसान जयकुमार ओगरे ने मछली पालन को अपना व्यवसाय बनाया है. वह अपनी निजी भूमि में तालाब निर्माण कराकर मछली पालन से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहा है. किसान ओगरे ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में उन्होंने अपने 01 हेक्टेयर भूमि में तालाब निर्माण कराया, जिसमें उनके द्वारा रोहू, कतला, मृगल किस्म की मछली का पालन किया जा रहा है.

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