छत्तीसगढ़

‘आप मनी लॉन्ड्रिंग में फंसे हैं…’ कॉल आया और 17 लाख उड़ गए! रायपुर में डिजिटल अरेस्ट का बड़ा शिकार

टिकरापारा निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति से साइबर ठगी; डराकर 17.15 लाख ट्रांसफर कराए, पुलिस ने शुरू की जांच

रायपुर। राजधानी में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रायपुर के टिकरापारा क्षेत्र में रहने वाले 55 वर्षीय अधेड़ को साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग में फंसने का डर दिखाकर 17 लाख 15 हजार रुपये ठग लिए।

पीड़ित शरद कुमार तिवारी, निवासी मोती नगर (वार्ड 54), ने देर रात टिकरापारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।


📞 एक कॉल… और शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल

पुलिस के अनुसार 15 फरवरी की सुबह करीब 10:30 बजे शरद के पास 9356675181 नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है और उन्हें “डिजिटली अरेस्ट” किया जा रहा है।

ठग ने डर और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाते हुए कहा कि अगर वह बचना चाहते हैं तो बताए गए बैंक खाते में तत्काल राशि ट्रांसफर करनी होगी। घबराए शरद ने 17,15,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।


🚔 देर रात थाने पहुंचे पीड़ित

जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तो रात 1:35 बजे उन्होंने टिकरापारा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धारा 318-4, 319-2 और 340-2 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है।


⚠️ क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी?

साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर व्यक्ति को डराते हैं। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग, पार्सल स्कैम या अन्य अपराध में फंसाने की बात कहकर “डिजिटल अरेस्ट” का झांसा दिया जाता है। फिर कथित जांच या सेटलमेंट के नाम पर बड़ी रकम ऐंठ ली जाती है।


🛑 पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर घबराएं नहीं। कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही किसी खाते में पैसा ट्रांसफर करने को कहती है।

रायपुर में बढ़ते ऐसे मामलों ने एक बार फिर चेतावनी दी है—डर ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है।

 

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