गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली की एक निचली अदालत ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि प्रथमदृष्टया इस मामले में मनीष सिसोदिया आपराधिक साजिश के सूत्रधार प्रतीत होते हैं और उन्होंने दिल्ली सरकार में अपने तथा अपने सहयोगियों के लिए करीब 90 से 1 सौ करोड़ रूपए की अतिरिक्त भुगतान से संबंधित आपराधिक साजिश में सबसे महत्वपूर्ण व मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि निचली अदालत की खारिज की गई जमानत याचिका को मनीष सिसोदिया ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
आप को बता दें दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर ED की ओर से वकील जोहेब हुसैन दलीलें रखीं। ED ने कहा कि दिमाग में कोई पॉलिसी नहीं बनाई जाती है। ED ने कोर्ट में कहा कि लाइसेंस फीस बढ़ने से प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा इसका कोई लॉजिक समझ नहीं आता है। बता दें कि इस मामले में आज यानी बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सिसोदिया और ईडी के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें दीं। ईडी ने कहा कि दिल्ली आबकारी नीति को संशोधित करने और उसे लागू करने में मनीष सिसोदिया ने अहम भूमिका निभाई थी। वहीं, मनीष सिसोदिया की ओर से कहा गया कि ईडी बिना अधिकार क्षेत्र के उनकी जांच कर रहा है।
ED ने कोर्ट में कहा कि सिसोदिया जीओएम के मुखिया थे और उनको ना सिर्फ कैबिनेट के बारे में सारी जानकारी थी। इसके साथ ही ईडी ने कहा कि पॉलिसी के बदलाव में भी वह मुख्य भूमिका में थे। ईडी ने कोर्ट में कहा कि पॉलिसी में फायदा पहुंचाने के बदले घूस ली गई। बता दें कि इससे पहले बीते 5 अप्रैल को ईडी ने कोर्ट में कहा था कि कथित शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया के खिलाफ धनशोधन की जांच महत्वपूर्ण चरण में है और इसमें उनकी संलिप्तता के नए सबूत मिले हैं। ऐसे में अभी उन्हें जमानत नहीं दी जाए।