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पर्यटन क्षेत्र में लक्षद्वीप को मालदीव का विकल्प बनाएगी मोदी सरकार, 8 मेगा प्रोजेक्ट्स का प्लान तैयार

केंद्र सरकार लक्षद्वीप को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है. मोदी सरकार का मकसद लक्षद्वीप को मालदीव का विकल्प तैयार करना है. लक्षद्वीप को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल बनाने के लिए यहां बंदरगाह और शिपिंग के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर सुधार की 8 बड़ी परियोजनाओं का प्लान बनाया गया है.

द्वीप समूह में कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 3,600 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है. उम्मीद की जा रही है इससे लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था में काफी वृद्धि होगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद भी लक्षद्वीप की यात्रा की थी, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी शेयर की गई थी. अब एक साल बाद केंद्र सरकार पर्यटकों के लिए लक्षद्वीप की कनेक्टिविटी बढ़ाने का फैसला किया है. खासतौर पर मालदीव जैसे देशों को कड़ी टक्कर देने के लिए 8 बड़ी परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी की हैं. इन योजनाओं के लागू होने के बाद लक्षद्वीप प्रमुख पर्यटन स्थल बनकर उभरेगा.

कौन-कौन सी हैं परियोजनाएं?

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां का एक प्रोजेक्ट कोच्चि से करीब 407 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. इसका नाम कदमथ द्वीप है. इसके पूर्वी और पश्चिमी छोर पर सुविधाएं विकसित करने की योजना है, जिसकी लागत 303 करोड़ रुपये आंकी गई है. इसके अलावा बड़े जहाजों के संचालन के लिए कवरत्ती, अगत्ती और मिनिकॉय द्वीपों का विस्तार, क्रूज जहाजों को भी संभालने की क्षमता, एन्ड्रोथ ब्रेकवाटर का रिन्यूअल शामिल है.

कहां और कैसा है लक्षद्वीप?

लक्षद्वीप इंडिया का एक छोटा केंद्र शासित प्रदेश है. प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. यह द्वीप समूह कोरल द्वीप और चट्टानों के लिए जाना जाता है. यह करीब 32 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है और करीब 4,200 वर्ग किलोमीटर के समुद्री क्षेत्र से घिरा है. लक्षद्वीप में 10 द्वीप, 17 निर्जन द्वीप, कई पुराने टापू, 4 नए टापू और 5 डूबी हुई चट्टानें हैं.

ये सभी द्वीप केरल के पश्चिमी तट से 220 से 440 किलोमीटर की दूरी पर अरब सागर में फैले हुए हैं.

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