पंचायत के खजाने में सेंध या बड़ा खेल? 17 लाख की रकम गायब, सचिव पर गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप
विकास कार्यों के लिए आई राशि पर उठे सवाल, जांच शुरू होते ही सामने आया मारपीट का दूसरा मामला

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले की एक ग्राम पंचायत में लाखों रुपये की राशि के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। पंचायत सचिव पर आरोप है कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दूसरे ग्राम पंचायत के वित्तीय कार्यों में हस्तक्षेप किया और लाखों रुपये की राशि निकाल ली। मामले में जांच शुरू होने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर विकास कार्यों के लिए मिली रकम कहां और कैसे खर्च हुई।
जानकारी के अनुसार, तराईगांव और सेमरा पंचायत में पदस्थ पंचायत सचिव किशन राठौर पर पिपरखुंटी ग्राम पंचायत के सरपंच के अधिकारों का कथित अतिक्रमण कर 15वें वित्त आयोग की राशि में अनियमितता करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि सचिव ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप किया और डिजिटल हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग के जरिए लगभग 17 लाख 26 हजार 600 रुपये की राशि निकाल ली।
बताया जा रहा है कि यह राशि 15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए प्राप्त हुई थी। जिला पंचायत कार्यालय द्वारा जारी पत्रों में मामले का उल्लेख होने के बाद पूरे घटनाक्रम ने तूल पकड़ लिया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि राशि का उपयोग नियमानुसार हुआ या फिर वित्तीय अनियमितता हुई है।
इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब भड़रापारा निवासी अमन साहू ने पंचायत सचिव और अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया। शिकायत के अनुसार 20 अप्रैल 2026 को पैतृक भूमि से जुड़े विवाद के दौरान उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। यह विवाद खसरा नंबर 2805 की जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है।
अमन साहू की शिकायत के आधार पर पेंड्रा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 296, 351(3) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय अनियमितता और मारपीट, दोनों मामलों की अलग-अलग जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल 17 लाख रुपये से अधिक की राशि को लेकर उठे सवालों ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।


