कर्नाटक में सत्ता का सबसे बड़ा उलटफेर! 3 जून को CM बन सकते हैं डीके शिवकुमार, आधी कैबिनेट बदलने की तैयारी?
सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद तेज हुई हलचल, कांग्रेस की अहम बैठक पर टिकी सबकी नजर

D. K. Shivakumar को लेकर कर्नाटक की राजनीति में चल रही अटकलों के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार 3 जून को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। उनके साथ 8 से 10 मंत्रियों के भी शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण के बाद राज्यसभा चुनावों के उपरांत कैबिनेट का बड़ा विस्तार किया जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व सरकार और संगठन दोनों में संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसके चलते मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।
आधे मंत्री बदल सकते हैं, नए चेहरों की एंट्री तय?
सूत्रों का दावा है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार में करीब 50 प्रतिशत नए चेहरों को मौका मिल सकता है। कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक के बाद क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कर्नाटक विधान परिषद के मुख्य सचेतक सलीम अहमद ने संकेत दिए हैं कि कैबिनेट गठन, उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति और प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसले कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद ही तय होंगे।
शाम तक हो सकती है औपचारिक घोषणा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता K. C. Venugopal और Randeep Surjewala महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है, जिसके बाद शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तारीख और स्वरूप का भी ऐलान होगा।
सिद्धारमैया का प्रभाव खत्म नहीं होगा?
हालांकि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी Siddaramaiah का राजनीतिक प्रभाव कम होता नहीं दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच उनकी मजबूत पकड़ कांग्रेस के लिए अब भी बेहद महत्वपूर्ण है।
उनका ‘अहिंडा’ सामाजिक समीकरण लंबे समय से कर्नाटक में कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व इस सामाजिक आधार को किसी भी तरह कमजोर नहीं होने देना चाहता।
राज्यसभा क्यों नहीं गए सिद्धारमैया?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सिद्धारमैया ने राज्यसभा की संभावित भूमिका स्वीकार करने के बजाय राज्य की राजनीति में सक्रिय बने रहने का फैसला किया है। इसे उनके राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व अब सरकार में डीके शिवकुमार की भूमिका और संगठन व सामाजिक आधार पर सिद्धारमैया के प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहा है।
असली परीक्षा अब शुरू होगी
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक नियंत्रण के साथ-साथ पार्टी के भीतर सभी गुटों को साथ लेकर चलने की होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा कठिन नई सरकार में संतुलन और स्थिरता बनाए रखना होगा।
फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में नजरें कांग्रेस विधायक दल की बैठक और आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो 3 जून को राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।



