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म्‍यांमार में इस्‍लामिक आतंक का भयानक रूप, हिन्‍दुओं और बौद्धों का जीवन संकट में, फिर भी चुप है दुनिया

मार में इस्लामिक आतंकवादी समूहों ने 1600 से अधिक हिंदुओं और 120 बौद्धों को बंधक बनाकर रखा है। दुखद यह है कि इन पर हो रहे मानवीय अत्‍याचार के खिलाफ अब तक कोई भी अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है । यूएन एवं अन्‍य अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍थाएं तो छोड़‍िए, जिनका काम ही मानवाधिकारों की रक्षा करना है, उसके हित में काम करना है और जो छोटी-छोटी बातों को भी कई बार तूल देकर वैश्‍विक रूप देने एवं किसी के भी खिलाफ माहौल बनाने में महारत रखती हैं, वह संस्‍थाएं भी इस विषय पर चुप्‍पी साधकर बैठी हैं, जैसे कि हिन्‍दू और बौद्धों के साथ होनेवाला यह अत्‍याचार कोई खबर ही न हो!

म्‍यांमार में हिन्‍दुओं पर अत्‍याचार का रोहिंग्‍याओं का इतिहास पुराना

देखा जाए तो पहले भी जब 2017 में रोहिंग्या आतंकी समूहों ने रखाइन राज्य में महिलाओं और बच्चों सहित 99 हिंदुओं का नरसंहार किया था, तब भी यह खबर तुरंत सामने नहीं आ सकी थी, किंतु रोहिंग्‍याओं ने इस घटना को अंजाम देते वक्‍त जिन हिन्‍दू महि‍लाओं और बच्‍चों को जबरन कलमा पढ़वाकर इस्‍लाम में कन्‍वर्ट किया और इन्‍हीं में से कुछ किसी तरह से भागने में कामयाब रहीं, तब इन महिलाओं की दुखद कहानियों से दुनिया को पता चला था कि ये रोहिंग्‍या इस्‍लाम को हर हाल में अधिक से अधिक फैलाने के लिए काम करनेवाले और दूसरे धर्मों के प्रति कितने क्रूर हैं।

पूरा घटनाक्रम कुछ इस प्रकार का रहा कि 1962 से 2011 तक वर्मा (म्यांमार) में सैन्‍य शासन दौरान यहां रोहिंग्‍या मुसलमान चुप बैठते हैं, लेकिन जैसे ही इस देश में लोकतंत्र की बहाली होती है, ये सड़कों पर प्रदर्शन करने, स्थानीय बहुसंख्‍यक बौद्ध समाज और अन्‍य हिन्‍दू समाज को प्रताड़‍ित करने लग जाते हैं। यहां तक कि महिलाओं के साथ बलात्‍कार करने, पुलिस और सेना तक को अपना निशाना बनाते हैं । तत्‍कालीन समय में म्‍यांमार का हाल इतना बुरा हो जाता है कि शांति के उपासक बहुसंख्‍यक बौद्ध जो कि पहले इनसे घबराए हुए थे, वह अपने अस्‍तित्‍व को बचाने के लिए शांति का मार्ग छोड़ देते हैं ।

रोहिंग्‍याओं के कारण शांति प्रिय बौद्ध हुए आक्रोशित

वर्ष 2012 में एक बुद्ध धर्म की युवती का बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी जाती है, इस घटना ने म्‍यांमार के सभी बौद्धों को इतना अधिक आक्रोशित किया कि उन्‍होंने भी सामने से खुलकर रोहिंग्‍याओं से लड़ना शुरू कर दिया। अब लड़ाई एकतरफा नहीं थी, अभी तक बौद्धों को ही एकतरफा नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन रोहिंग्‍या भी अब नुकसान उठा रहे थे। जिसके कारण से रोहिंग्‍या मुसलमान यहां की सत्‍ता को बड़ा सबक सिखाने की योजना बनाने लगे और फिर रोहिंग्‍याओं की ‘‘अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी’’ (एआरएसए, इस्‍लामिक आतंकवादी संगठन), ने अक्टूबर 2016 में बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर म्‍यांमार की सैन्य चौकियों पर हमला कर दिया, जिसमें नौ सीमा अधिकारी और चार सैनिक मारे गए।

इतने पर भी जब इनका मन नहीं भरा तो इस आतंकी संगठन एआरएसए ने 25 अगस्त 2017 को 30 पुलिस चौकियों और एक सेना के बेस पर आक्रमण कर दिया, जिसमें 12 सुरक्षाकर्मियों की मौत होती है। म्‍यांमार के पुलिस कर्मियों और सेना के जवानों की एक के बाद हमलों में मौंत होने पर जब म्‍यांमार की जनता सरकार के विरोध में सड़कों पर उतरती है, असल में तब सही तरीके से म्यांमार की सेना रोहिंग्या बहुल क्षेत्र पर कार्रवाई करने आगे आती है, यहां कार्रवाई के दौरान सेना को हिन्दुओं और बौद्धों की सामूहिक कब्र मिलती है और इसके बाद पूरी दुनिया को पहली बार पता चलता है कि ये रोहिंग्‍या कितने क्रूर और हिंसक हैं।

रखाईन प्रांत में रह रहे हिंदुओं पर सबसे भयंकर अत्‍याचार हुए

कहना होगा कि तब से अब तक अनेक मीडिया रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं। तत्‍कालीन समय में तमाम मीडिया संस्‍थानों समेत ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने रोहिंग्‍याओं द्वारा प्रताड़‍ित किए गए लोगों से बात की थी। साक्ष्‍यों के आधार पर इस अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍था (एमनेस्टी इंटरनेशनल) ने पाया कि इन रोहिग्‍याओं ने यहां अल्‍प जनसंख्‍या में रहने वाले हिन्‍दुओं पर भी भयंकर अत्‍याचार किए हैं। रोहिंग्या आतंकियों ने रखाईन प्रांत में रह रहे हिंदुओं पर आरोप लगाया कि वे म्यांमार की बौद्ध सरकार का समर्थन करते हैं और उनके अलगाववादी विचारधारा के खिलाफ सरकार की सहायता कर रहे हैं। इसलिए हम उनकी प्रताड़ना और नरसंहार जब तक जारी रखेंगे तब तक वह या तो इस्‍लाम कबूल नहीं कर लेते या फिर रखाईल प्रान्‍त छोड़कर भाग नहीं जाते हैं। ‘एमनेस्टी’ ने अपनी पड़ताल में पाया कि रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने वर्ष 2017 में म्यांमार में 99 हिन्दुओं का नरसंहार किया था। हिंदू बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को मारकर जमीन में गाड़ दिया था।

उन हिन्‍दुओं को ही जिंदा छोड़ा जिन्‍होंने कलमा पड़ा और स्‍वीकारा इस्‍लाम

‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ की यह रिपोर्ट कहती है, नकाबपोश रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने सुबह-सुबह गाँव में घुसकर हिन्दू महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को घेरा, उनके घरों को लूटा। इसके बाद पुरुषों को अलग करके सबसे पहले उनका नरसंहार किया। इन इस्‍लामिक आतंकियों ने बच्‍चों तक पर कोई रहम नहीं किया, उन्‍हें भी बड़ी क्रूरता के साथ मार दिया गया। मारे गए इन हिन्दुओं की लाशें बाद में एक सामूहिक कब्र में पाई गईं। इस दौरान रोहिंग्या मुस्लिमों ने कुछ महिलाओं को तभी छोड़ा, जब उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करा दिया गया। बाकी सभी को मारकर दफना दिया गया था । वहीं, जिन आठ महिलाओं ने मुस्लिम बनने की शर्त कबूल कर अपनी जान बचाई, उनकी गवाही भी आज एक साक्ष्‍य के रूप में आज मौजूद है। जांच में यह भी सामने आया है कि रोहिंग्या आतंकियों ने इसके अतिरिक्त भी अन्य कई मौकों पर हिन्दुओं को निशाना बनाया था।

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