शिक्षकों के नाम पर चला करोड़ों का ‘लोन गेम’! 3 महीने बाद खुला सबसे बड़ा राज, 43 शिक्षक बने शिकार, 5 आरोपी गिरफ्तार
कोंडागांव पुलिस ने अंतरजिला ठगी गिरोह का किया पर्दाफाश, 10 से 12 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज और एटीएम कार्ड समेत कई अहम सबूत जब्त।

कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में शिक्षकों को पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी और कई महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, अब तक 43 शिक्षकों को इस गिरोह ने अपना शिकार बनाया है और उनसे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। हालांकि पीड़ितों का दावा है कि सामाजिक संकोच और बदनामी के डर से कई शिक्षक अब भी सामने नहीं आए हैं। आशंका है कि जिले में 150 से 200 शिक्षक इस ठगी के शिकार हो सकते हैं।
शिकायतों से खुला करोड़ों की ठगी का खेल
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने पर्सनल लोन के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर ने करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। वहीं देवेन्द्र किशोर खवास, योगेश्वर बैद्य सहित अन्य शिक्षकों की शिकायतों के बाद फरसगांव और केशकाल थानों में चार अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू की गई।
ऐसे बिछाया जाता था ठगी का जाल
जांच में सामने आया कि गिरोह पहले शिक्षकों से संपर्क कर कम समय में विभिन्न बैंकों से बड़ी राशि का पर्सनल लोन दिलाने का भरोसा देता था। बैंक कर्मचारियों और लोन एजेंटों के माध्यम से अलग-अलग बैंकों में लोन स्वीकृत कराया जाता था।
लोन मिलने के बाद शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत राशि दी जाती थी, जबकि 60 प्रतिशत रकम आरोपियों और उनके सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी। पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि दो से तीन वर्षों में पूरा लोन, ब्याज और अन्य भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी रकम लेकर फरार हो जाते थे और पूरा कर्ज शिक्षकों के सिर पर छोड़ देते थे।
फर्जी दस्तावेजों का भी किया इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। शिक्षकों के पते बदलकर नकली पहचान पत्र बनवाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराया गया।
तीन महीने की जांच के बाद गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा (IPS) के निर्देशन में विशेष जांच टीम गठित की गई। बैंक खातों का विश्लेषण, मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के बाद पुलिस ने अलग-अलग जिलों में दबिश देकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
- शिवशंकर दास (अंबिकापुर)
- दिलीप कुमार सोनी (अंबिकापुर)
- विरेंद्र तिर्की (जशपुर)
- श्यामसुंदर जांगड़े (सारंगढ़)
- अंशुमान सिंह (अंबिकापुर)
ये सामान हुए जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी, रजिस्टर, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर और अन्य बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इनकी जांच जारी है।
अन्य जिलों तक फैले नेटवर्क की जांच
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह केवल कोंडागांव तक सीमित नहीं है। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर अन्य जिलों में सक्रिय सदस्यों, बैंक एजेंटों और सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी क्रेडिट रिकॉर्ड (CIBIL) अपडेट होने में लगने वाले समय का फायदा उठाकर दो से तीन दिनों के भीतर एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग बैंकों से कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा लेते थे। इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।



